अभी तो है सजी महफिल, अभी तो पास साकी है
अभी तो होश में हूँ मैं, अभी तो जाम बाकी है
नहीं भूला हूँ मैं कुछ भी, ठिकाना याद है अपना
अभी मैं और क्षलकाओ, अभी ना मैंने ना की है
नशे में जानकार मुझको, अरे क्या माँग तुम बैठे
जान लो, ये ना लो हमसे, निशानी ये तो माँ की है
पिए बिन ही नशें में हम, अजब अहसास है ये भी
पीयेगी रिंद संग साकी, ज़माने बाद हाँ की है
नशे में डूबकर खुद जो शराबी कह रहा मुझको
शिकायत शेख जी से मैकदे में खुद ही जा की है
डॉ आशुतोष मिश्र
आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी
बभनान गोंडा
उत्तरप्रदेश
मोबाइल न० ९८३९१६७८०१
नशे में जानकार मुझको, अरे क्या माँग तुम बैठे ||
ReplyDeleteसुन्दर प्रस्तुति |
बधाई स्वीकारें ||
प्रभावी भावाभिव्यक्ति , आभार .
ReplyDeleteकृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें /
वाह! वेहतरीन
ReplyDeleteअभी तो होश में हूँ मैं, अभी तो जाम बाकी हैj
ReplyDeleteअभी तो है सजी महफिल, अभी तो पास साकी है
अभी तो होश में हूँ मैं, अभी तो जाम बाकी है... bhaut hi khubsurat.....
नहीं भूला हूँ मैं कुछ भी, ठिकाना याद है अपना
ReplyDeleteअभी मैं और क्षलकाओ, अभी ना मैंने ना की है
मय और मयकदा मुबाराक .बेहतरीन प्रस्तुति .
बहुत सुन्दर प्रस्तुति
ReplyDeleteजरूरी कार्यो के कारण करीब 15 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
ReplyDeleteआप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,
खूबसूरत गज़ल ...
ReplyDeleteक्षलकाओ ... छलकाओ ..शायद उचित लगेगा ..
पिए बिन ही नशें में हम, अजब अहसास है ये भी
ReplyDeleteपीयेगी रिंद संग साकी, ज़माने बाद हाँ की है
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है आशुतोष जी बधाई हो आपको
bahut sunder prastuti.
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteबढ़िया. काफी दिनों बाद आपके ब्लॉग पर ग़ज़ल पढ़ के अच्छा लगा. अच्छी प्रस्तुति. बधाई.
ReplyDeleteखुबसूरत और उम्दा गजल
ReplyDeleteखूबसूरत गज़ल ...
ReplyDeleteनशे में डूबकर खुद जो शराबी कह रहा मुझको
ReplyDeleteशिकायत शेख जी से मैकदे में खुद ही जा की है
वाह वाह हर शेर खुबसूरत दाद को मुहताज नहीं , बहुत खूब
बहुत खूब।
ReplyDeleteवाह मिश्रा जी !
ReplyDeleteहर शेर अर्थपूर्ण
very nice sir.
ReplyDeleteवाह क्या बात है।
ReplyDeleteबेस्ट ऑफ़ 2011
ReplyDeleteचर्चा-मंच 790
पर आपकी एक उत्कृष्ट रचना है |
charchamanch.blogspot.com
नहीं भूला हूँ मैं कुछ भी, ठिकाना याद है अपना
ReplyDeleteअभी मैं और क्षलकाओ, अभी ना मैंने ना की है
बहुत अच्छी ग़ज़ल .कृपया 'मैं 'और छलकाओ को 'मय' और छलकाओ कर लें .