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Sunday, 16 October 2011

अभी तो होश में हूँ मैं, अभी तो जाम बाकी हैj

अभी तो है सजी महफिल, अभी तो पास साकी है
अभी तो होश में हूँ मैं, अभी तो जाम बाकी है 

नहीं भूला हूँ मैं कुछ भी, ठिकाना याद है अपना  
अभी मैं और क्षलकाओ, अभी ना मैंने ना की है 

नशे में जानकार मुझको, अरे क्या माँग तुम बैठे
जान लो, ये ना लो हमसे, निशानी ये तो माँ की है 

पिए बिन ही नशें में हम, अजब अहसास है ये भी 
पीयेगी रिंद संग साकी, ज़माने बाद हाँ की है 

नशे में डूबकर खुद जो शराबी कह रहा मुझको 
शिकायत शेख जी से मैकदे में खुद ही जा की है

डॉ आशुतोष मिश्र
आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी
बभनान गोंडा
उत्तरप्रदेश
मोबाइल न० ९८३९१६७८०१

21 comments:

  1. नशे में जानकार मुझको, अरे क्या माँग तुम बैठे ||

    सुन्दर प्रस्तुति |
    बधाई स्वीकारें ||

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  2. प्रभावी भावाभिव्यक्ति , आभार .
    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें /

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  3. अभी तो होश में हूँ मैं, अभी तो जाम बाकी हैj
    अभी तो है सजी महफिल, अभी तो पास साकी है
    अभी तो होश में हूँ मैं, अभी तो जाम बाकी है... bhaut hi khubsurat.....

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  4. नहीं भूला हूँ मैं कुछ भी, ठिकाना याद है अपना
    अभी मैं और क्षलकाओ, अभी ना मैंने ना की है
    मय और मयकदा मुबाराक .बेहतरीन प्रस्तुति .

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  6. जरूरी कार्यो के कारण करीब 15 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  7. खूबसूरत गज़ल ...

    क्षलकाओ ... छलकाओ ..शायद उचित लगेगा ..

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  8. पिए बिन ही नशें में हम, अजब अहसास है ये भी
    पीयेगी रिंद संग साकी, ज़माने बाद हाँ की है
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है आशुतोष जी बधाई हो आपको

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  9. This comment has been removed by the author.

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  10. बढ़िया. काफी दिनों बाद आपके ब्लॉग पर ग़ज़ल पढ़ के अच्छा लगा. अच्छी प्रस्तुति. बधाई.

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  11. खुबसूरत और उम्दा गजल

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  12. नशे में डूबकर खुद जो शराबी कह रहा मुझको
    शिकायत शेख जी से मैकदे में खुद ही जा की है
    वाह वाह हर शेर खुबसूरत दाद को मुहताज नहीं , बहुत खूब

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  13. वाह मिश्रा जी !
    हर शेर अर्थपूर्ण

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  14. बेस्ट ऑफ़ 2011
    चर्चा-मंच 790
    पर आपकी एक उत्कृष्ट रचना है |
    charchamanch.blogspot.com

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  15. नहीं भूला हूँ मैं कुछ भी, ठिकाना याद है अपना
    अभी मैं और क्षलकाओ, अभी ना मैंने ना की है
    बहुत अच्छी ग़ज़ल .कृपया 'मैं 'और छलकाओ को 'मय' और छलकाओ कर लें .

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